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Showing posts from June, 2026

व्यंग्य: सपनों का पेट, हकीकत का गिटार? कब बजेगी फिटनेस की तार?

हमारे समाज में फिटनेस अब एक नए 'संस्कार' के रूप में लोगों के दिमाग बैठ चुकी है। हर व्यक्ति इस राह पर चलने लगा है, जहां "प्रोटीन शेक्स" को आशीर्वाद की तरह लिया जाता है और वजन घटाने वाले डाइट प्लान को किसी शास्त्र की तरह माना जाता है। लेकिन हम सब जानते हैं कि फिटनेस की इस धारणा में कुछ बातें इतनी सरल नहीं हैं जितनी कि ये दिखती हैं। । खासकर जब हम 'पेट' जैसे जटिल विषय पर बात करें। तो आज हम इसी पेट के इर्द-गिर्द एक मजेदार और व्यंग्यपूर्ण यात्रा पर निकलते हैं, जिसमें फिटनेस की बात होगी, लेकिन चुटीले अंदाज में!  बढ़ता हुआ पेट और समाज का प्यारभरा आशीर्वाद सबसे पहले तो एक सवाल– क्या आपने कभी सोचा है कि पेट बढ़ता क्यों है? यह हमारे समाज का आशीर्वाद है। हां, यही बात है। शादी के बाद लोग तुरंत पूछते हैं, "अरे! पेट कब आएगा?" जब आपके पेट पर थोड़ा सा भी 'संकेत' मिलता है, तो समाज में हर व्यक्ति फिटनेस गुरू बन जाता है। पड़ोसी आंटी से लेकर ऑफिस के सहकर्मी तक, सब आपको हेल्दी डाइट प्लान और व्यायाम के सुझाव देने लगते हैं। और अगर आप जिम जाने का इरादा भी करते हैं,...

दिल टूटा या अहंकार घायल हुआ? प्रेम के बाद पुरुष मन की डिजिटल राजनीति... आइए जाने

Image Source: google पत्रकारिता के विद्यार्थी अक्सर पढ़ते हैं कि समाचार क्या होता है। उन्हें सिखाया जाता है कि जिसे कोई छिपाना चाहता है, वही समाचार है, बाकी सब विज्ञापन है । लेकिन प्रेम के क्षेत्र में कुछ पुरुषों ने इस सिद्धांत को उल्टा कर दिया है। यहां जो बात दो लोगों के बीच छिपी रहनी चाहिए, वही सबसे पहले समाचार बना दी जाती है। जो स्मृतियां निजी होनी चाहिए, वे ब्रेकिंग न्यूज़ बन जाती हैं। जो संवाद सिर्फ दो दिलों के बीच होने चाहिए, वे सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बना दिए जाते हैं। और फिर वही लोग शिकायत करते हैं कि लड़कियां प्रेम से डरती हैं। लड़कियां प्रेम से नहीं डरतीं। वे इस बात से डरती हैं कि कहीं उनका प्रेमी भविष्य में एक चलता-फिरता मीडिया हाउस न निकल जाए। प्रेम के समय वह व्यक्ति प्रेमी होता है, लेकिन ब्रेकअप के बाद अचानक संपादक, रिपोर्टर, पीआर एजेंट, कंटेंट क्रिएटर, डिजिटल मार्केटर और सोशल मीडिया मैनेजर सब कुछ बन जाता है। उसके पास पुरानी तस्वीरों का आर्काइव होता है, चैट्स का डेटाबेस होता है, निजी बातों की रिकॉर्डिंग होती है और सबसे खतरनाक चीज़ होती है...घायल अहंकार। मीडिया की भाषा म...