अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग में पहुंचे थे "डील मेकर" बनकर, लेकिन शी जिनपिंग ने बैठते ही ताइवान वाली “रेड लाइन” टेबल पर रख दी।
कहानी कुछ ऐसी रही कि ट्रंप बोले...
“शी मेरे अच्छे दोस्त हैं…”
और उधर शी जिनपिंग ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया...
“दोस्ती अपनी जगह, लेकिन ताइवान पर उंगली उठी तो फिर दोस्ती भी सीमा शुल्क में फंस जाएगी!”
दो घंटे की बैठक में चीन ने अमेरिका को साफ संदेश दे दिया कि
“वन चाइना पॉलिसी कोई WhatsApp DP नहीं है, जिसे कभी भी बदल दिया जाए।”
ट्रंप ने माहौल हल्का करने के लिए चीन-अमेरिका रिश्तों को भविष्य के लिए जरूरी बताया,
लेकिन शी जिनपिंग का अंदाज़ ऐसा था जैसे कोई स्कूल का प्रिंसिपल लेट आए छात्र को अनुशासन समझा रहा हो।
उधर दुनिया सोच रही थी कि ट्रेड वॉर पर बात होगी,
लेकिन चीन ने पूरा GPS घुमाकर ताइवान पर सेट कर दिया।और मजेदार बात ये रही कि जब बीजिंग में ट्रंप और जिनपिंग “शांति” की बातें कर रहे थे,
उसी वक्त रूस ने यूक्रेन पर मिसाइलों की बारिश तेज कर दी।
मतलब दुनिया का हाल ऐसा हो चुका है कि
एक तरफ महाशक्तियां “डायलॉग” कर रही हैं,
दूसरी तरफ मिसाइलें “लाइव कमेंट्री” दे रही हैं।
अब हालत ये है कि
अमेरिका कह रहा है,
“लोकतंत्र बचाना है।”
चीन कह रहा है:
“ताइवान हमारा है।”
रूस कह रहा है:
“हम तो बस ऑपरेशन चला रहे हैं।”
और आम आदमी पूछ रहा है:
“भाई पेट्रोल सस्ता कब होगा?”
ताइवान अब सिर्फ एक द्वीप नहीं रहा,
वो दुनिया की सबसे महंगी राजनीतिक बहस बन चुका है।
क्योंकि वहां से निकलने वाली चिप्स पर पूरी दुनिया का मोबाइल, लैपटॉप, AI और अर्थव्यवस्था टिकी हुई है।
इस बीच खबर ये भी है कि चीन लगातार ताइवान के आसपास सैन्य ड्रिल बढ़ा रहा है।
अमेरिका इंडो-पैसिफिक में अपने सहयोगियों (जापान, फिलीपींस और ऑस्ट्रेलिया) के साथ सैन्य साझेदारी मजबूत कर रहा है।
यानी माहौल ऐसा है कि
दुनिया “कोल्ड वॉर 2.0” का ट्रेलर देख रही है और नेता इसे “कूटनीतिक वार्ता” बता रहे हैं।
सबसे दिलचस्प दृश्य तब बना जब ट्रंप ने जिनपिंग को “महान नेता” बताया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा...
“ट्रंप जहां जाते हैं, पहले तारीफ करते हैं… फिर टैरिफ लगा देते हैं।”
अब दुनिया की निगाह इस बात पर है कि
क्या अमेरिका ताइवान से दूरी बनाएगा
या फिर लोकतंत्र के नाम पर चीन की नसों पर हाथ रखेगा।
फिलहाल बीजिंग से यही संदेश निकला है...
“दोस्ती चलेगी…
लेकिन ताइवान पर चीन की शर्तों के साथ!”
✍️...रघुनाथ सिंह
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