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The Hindu और The New Indian Express की पक्षपाती पत्रकारिता पर सवाल: आतंकियों के नरसंहार पर भी एजेंडा?

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में  हिंदुओं के सुनियोजित नरसंहारने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मज़हबी आतंकियों ने हिन्दू तीर्थयात्रियों से पहले उनका धर्म पूछा, नाम पूछा, कुछ से कपड़े उतरवाए और फिर केवल पुरुषों को गोली मार दी। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को अपनी आंखों के सामने मरते देखा, लेकिन कुछ मीडिया संस्थानों ने इस बर्बर हमले की सच्चाई को छिपाने और उसका राजनीतिकरणकरने की कोशिश की। सबसे चौंकाने वाला व्यवहार द न्यू इंडियन एक्सप्रेस  और The Hindu जैसे तथाकथित प्रतिष्ठित अखबारों ने दिखाया है। इन दोनों मीडिया संस्थानों ने न केवल नरसंहार की गंभीरता को कमतर दिखाया, बल्कि संदेहास्पद तर्कों और पाकिस्तान समर्थक नैरेटिव को आगे बढ़ाया। The New Indian Express की नीना गोपाल ने तो  "क्या पहलगाम जाफर एक्सप्रेस अपहरण का बदला है?" जैसे अजीबो-गरीब शीर्षक के साथ एक लेख लिख डाला। इस लेख में उन्होंने कश्मीर के हिंदू नरसंहार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हुए हमले के प्रतिकारक घटना के रूप में चित्रित करने की घिनौनी कोशिश की है। यह न केवल पत्रकारिता की मूल आत्मा के खिलाफ है, बल्कि यह भार...

घास की चाय! वाह!वाह

घास की चाय! वाह!वाह "निम्बूक तृणम" से बनी यह चाय पूरी तरह से प्राकृतिक है। इसमें तृण तथा पानी के अलावा और कुछ नहीं है। इसका शानदार अरोमा है। सेहत के लिए भी कई फायदे बताये जाते हैं। दो-तीन दिन पीने से ही आपको फर्क दिखने लगता है।  विधि जंगल में घूमने जाएं और अगर यह घास दिखती है तो इसके सिर्फ चार नवतृणों को खींचकर निकाल लें। घर लाकर धोयें और तृणों के निचले हिस्से को धनिये की तरह काट लें। इस बीच केतली में डेढ़ कप पानी उबलने के लिए रख दें। फिर इन टुकड़ों को कैटल के पानी में डाल दें। पूरा किचन एक शानदार हल्की हल्की खुशबू से भर जाएगा। पांच मिनट तक उबलने दें, फिर कप में छान लें। आपकी निम्बूक तृणम चाय तैयार है।  इसके फायदे मैं नहीं बताऊंगा। यह बताना रासायनविदों का काम है। हां यह अवश्य बताऊंगा कि किसी को इससे एलर्जी भी हो सकती है। इसलिए शुरुआत बहुत थोड़ी मात्रा से करें। अगर फायदा महसूस हो तो रोज सुबह एक कप पी सकते हैं। इस चर्चा में एक और बात बताना जरूरी लग रहा है कि "तृणसी" शब्द संस्कृत का है और घास शब्द "प्राकृत" से निकला है। प्राकृत का मूल शब्द है "घस", ...

मस्ती और रंगों का महापर्व है होली

भारत में होली का पर्व हर्षोल्लास का पर्व है। सभी लोग छोटे-बड़े का भेद भुलाकर पूरे उत्साह, उल्लास और मस्ती से यह रंगों का पर्व मनाते हैं। भारतीय सनातन परम्परा के अनुसार यह एक यज्ञीय पर्व है। इस समय नई फसल पकने लगती हैं, उसके उल्लास में सामूहिक यज्ञ के रूप में होली जलाकर नये अन्न की यज्ञ मे आहुतियां देकर बाद में उपयोग में लाते हैं। कृषि प्रधान देश की यज्ञीय संस्कृति के सर्वथा अनुकूल यह परिपाटी बनाई गई है। होली के पर्व को लेकर उत्साह होना स्वाभाविक है। इसका नाम न केवल सबके मन को अपने रंग से भरता है बल्कि डुबा भी देता है। हृदय के अन्तराल में सहानुभूति और प्रेम के अविरल स्रोत खुलने लगते हैं। ये उमंग की तरंगें जिस के भी दिल को छूती हैं, उसे ऐसा लगता है कि जैसे वह खुशी से झूम रहा है। इस पर्व का उल्लास महासिंधु की तरह हैं जिसमें हर कोई डुबकी लगाने को उत्सुक रहता। कुछ ऐसा लगता है जैसे जीवन में नई उम्मीदों की शाखाएं फूट पड़ी हो। हमारा मन आकुल होने लगता है- मस्ती में उमगते हुए इस उल्लास को बांटने के लिए बस क्या क्या न कर डालूं। होली के पर्व पर यही व्याकुलता सभी को व्याकुल करने लगती है। रंगो की मस्त...

PM Modi-Donald Trump की मुलाकात पर अमेरिकी मीडिया में क्या कहा जा रहा है? आइए जाने...

Image Source: Google 12 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्हाइट हाउस में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाक़ात की, जिसमें दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सौदे और अवैध प्रवासियों की वापसी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे भारतीय नागरिकों को वापस लेने की प्रतिबद्धता जताई, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यापार घाटा कम करने, टैरिफ़ से जुड़ी चिंताओं और भारत द्वारा अमेरिका से तेल व गैस की ख़रीद पर जोर दिया। बैठक में रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी सहमति बनी। यह मुलाक़ात ऐसे समय में हुई जब ट्रंप प्रशासन अवैध प्रवासियों को वापस भेजने और नए टैरिफ़ लागू करने को लेकर सख्त नीति अपना रहा है, जिससे यह वार्ता द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों को नई दिशा मिल सकती है, लेकिन अब देखना होगा कि इन समझौतों को ज़मीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाता है। Washington Post (वॉशिंगटन पोस्ट) की रिपोर्ट अमेरिका के प...

Kejriwal का ‘नाटकशास्त्र’: झाड़ू से जेल तक और दिल्ली की सत्ता में BJP की ‘ऐतिहासिक एंट्री

विलियम शेक्सपियर ने "As You Like It" में लिखा था, "All the world is a stage, and all the men and women merely players." दिल्ली की राजनीति किसी थिएटर से कम नहीं रही। मंच वही था, पर स्क्रिप्ट हर पांच साल में बदलती रही। कभी 'आम आदमी' जनता का हीरो बना, तो कभी वही जनता उसे विलेन बनाने लगी। अरविंद केजरीवाल, जो राजनीति में ‘ईमानदारी की मशाल’ लेकर आए थे, दिल्ली विधानसभा चुनाव में उस मशाल से अपना ही राजनैतिक भविष्य जलाते दिखे। और अंततः  2025 में, यह ड्रामा अपने चरम पर पहुंच गया, जिसमें दिल्ली की जनता ने ‘नाटक मंडली’ को उखाड़ फेंका और नरेंद्र मोदी की ‘विकास गारंटी’ पर मोहर लगा दी। William Shakespeare की तरह केजरीवाल भी अपने आप को एक ट्रैजिक हीरो समझते थे। कुछ-कुछ ‘हेमलेट’ की तरह, जो अपनी ही उलझनों में फंसकर खुद का विनाश कर बैठा। मगर यहां कहानी थोड़ी अलग थी। ये ट्रैजिक हीरो भ्रष्टाचार की गर्त में इतने गहरे उतर चुके थे कि ‘दिल्ली दरबार’   ने उन्हें खलनायक का रोल दे दिया। और वर्ष 2025 का चुनावी नतीजा इस ‘राजनीतिक नाटक’ का ग्रैंड फिनाले बन गया। जब वर्ष 2013 में पहली बार...

डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ वार,क्या होगा व्यापार का भविष्य अबकी बार?

Donald Trump  Image Source : Google  ट्रंप का व्यापार युद्ध: वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा या अवसर? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत व्यापार नीति में बड़े बदलावों के साथ की, जिसमें चीन, कनाडा और मैक्सिको से आयातित वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाए गए। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह कदम अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करेगा, अवैध प्रवास को रोकेगा और नशीली दवाओं की तस्करी पर अंकुश लगाएगा। लेकिन आर्थिक विशेषज्ञ इस नीति को वैश्विक व्यापार प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती मान रहे हैं। इस व्यापार युद्ध से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं और कई देशों ने जवाबी कदम उठाने की घोषणा की है। इस व्यापार युद्ध की पृष्ठभूमि को समझने के लिए हमें अमेरिका और चीन के बीच दशकों से चले आ रहे व्यापारिक असंतुलन पर नजर डालनी होगी। अमेरिका लंबे समय से चीन पर अनुचित व्यापारिक नीतियों का आरोप लगाता रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि चीन सरकारी सब्सिडी और अन्य तरीकों से अपनी कंपनियों को वैश्विक बाजार में अनुचित लाभ प्रदान करता है। यही कारण है...

Mahakumbh 2025: योगी, ऋषि, संतों का संग, कुंभ में बसता हरि का रंग

                      Mahakumbh 2025: योगी, ऋषि, संतों का संग, कुंभ में बसता हरि का रंग संगम में प्रवाहित पुण्य की धारा, संतों के तप से आलोकित हुआ धर्म का उजियारा. ऋषियों की वाणी, सन्यासियों की साधना, कुंभ में खुला योग, ध्यान और ब्रह्मज्ञान का खजाना. प्रयागराज में हर-हर महादेव, जय जय श्रीराम, महाकुंभ में गूंजा ईश्वर का पावन नाम. महाकुंभ 2025 का पावन आयोजन अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। वसंत पंचमी (3 जनवरी 2025) के दिन हुए तीसरे अमृत स्नान ने सनातन धर्म की दिव्यता और अखाड़ों की आस्था का भव्य स्वरूप प्रकट किया। त्रिवेणी संगम के तट पर जब नागा संन्यासी गदा, तलवार और त्रिशूल लहराते हुए पहुंचे, तो पूरा प्रयागराज "हर-हर महादेव" और "जय सियाराम" के जयघोषों से गूंज उठा। महाकुंभ केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्गदर्शन करने वाला महापर्व है। इस आयोजन में साधु-संतों से लेकर श्रद्धालु भक्तों तक, सभी ने आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। महाकुंभ का महत्व और सनातन परंपरा महाकुंभ विश्व का सबस...