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दिल्ली से दून, न्यूयॉर्क से लंदन, छठ का त्यौहार, हर जगह रोशन

  1. सूर्य को अर्घ्य देने की ये परंपरा, विदेशों में भी छठ का अनोखा नज़ारा
  2. संस्कृति की ये धारा अब सीमाओं को पार, छठ ने जोड़ा हर दिल, हर घर और द्वार
छठ पूजा, सूर्य देव की आराधना का ऐसा पर्व है जो गहरी श्रद्धा और भक्ति से भरा हुआ है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह पर्व अपने सांस्कृतिक रंग में रचा-बसा है। इस पर्व में व्रत, स्नान और उगते व डूबते सूर्य को अर्घ्य देने जैसी परंपराएँ शामिल हैं। यह त्योहार न केवल प्राचीन परंपराओं की याद दिलाता है, बल्कि इसमें आधुनिक जीवन से जुड़े अनुशासन और संयम के मूल्य भी समाहित हैं।

आज यह पर्व केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रह गया है; यह एक सांस्कृतिक सेतु बन चुका है जो भारतीय प्रवासी समुदाय को जोड़ता है। इस लेख में हम छठ पूजा के पवित्र और आस्था से भरे इस पर्व के मूल, इसके अनुष्ठानों और इसके वैश्विक विस्तार को समझेंगे।

छठ पूजा की उत्पत्ति और महत्व की एक झलक

ठ का नाम संस्कृत के शब्द ‘षष्ठी’ से लिया गया है, जिसका अर्थ छठा दिन होता है। यह चार दिवसीय पर्व सूर्य देव और उनकी पत्नी छठी मइया को समर्पित है, जो जीवन, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस पर्व में प्रकृति और उसके तत्वों का आदर और कृतज्ञता भी व्यक्त की जाती है। ऐतिहासिक रूप से माना जाता है कि इस पूजा का उल्लेख महाभारत में भी हुआ है, जहाँ द्रौपदी और पांडवों ने सूर्य देव की कृपा पाने के लिए छठ पूजा की थी।

छठ पूजा के अनोखे अनुष्ठान: एक भक्त का सफर

छठ पूजा के अनुष्ठान भक्तों की आस्था और अनुशासन का प्रतीक हैं। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में फैकल्टी श्री विनोद कुमार सिंह इस पर्व के चारों दिनों को समझते हुए बताते हैं कि इसके पहले दिन की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसका अर्थ है स्नान और पवित्र भोजन। इस दिन भक्त पवित्र जल में स्नान करते हैं और सात्विक भोजन बनाकर ग्रहण करते हैं। इसके बाद दूसरा दिन है-खरना।इस दिन भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद एक सादा भोजन ग्रहण करते हैं, जिसमें ज्यादातर रोटी और गुड़ की खीर होती है।

श्री विनोद आगे बताते हैं कि तीसरा दिन है दिन संध्या अर्घ्य।इस दिन सूर्यास्त के समय जलाशयों में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद चौथा दिन है उषा अर्घ्य। साथ ही, अंतिम दिन, उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन होता है, जिसके बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

छठ पूजा का विश्वव्यापी विस्तार

छठ पूजा अब पूरी दुनिया में भारतीय समुदायों के बीच मनाया जाने लगा है। अमेरिका, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, न्यूज़ीलैंड और फ़िजी जैसे देशों में यह पर्व अब उसी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।अमेरिका: न्यूयॉर्क, सैन जोस और शिकागो में भारतीय समुदाय इस पर्व को स्थानीय झीलों और नदियों पर मनाता है।

यूके: लंदन, लीसेस्टर और बर्मिंघम जैसे शहरों में भारतीय समुदाय के लोग पानी के छोटे जलाशयों में सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

मॉरीशस और फ़िजी: यहाँ छठ पूजा एक राष्ट्रीय त्योहार बन चुका है, जो भारतीय संस्कृति का अनोखा संगम दिखाता है।

प्रकृति और समाज से जुड़ने का माध्यम

छठ पूजा का असली सार इसकी सादगी और प्रकृति के प्रति सम्मान में निहित है। यह पर्व जीवन को सरलता और आध्यात्मिकता के साथ जोड़ता है। प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए यह पर्व उनकी जड़ों से जुड़ने का एक माध्यम बन गया है, जहाँ वे अपने परिवार और समाज के साथ एकजुटता महसूस करते हैं।

आधुनिक समय में छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक ठहराव का पर्व है। यह पर्व संयम, शुद्धता और श्रद्धा का ऐसा सन्देश देता है जो भौतिक दुनिया से ऊपर उठकर जीवन के सरल और पवित्र आनंद की याद दिलाता है। यह पर्व केवल भारतीयता का प्रतीक नहीं, बल्कि एक ऐसा सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है जो विश्वभर में भारतीय समुदायों को जोड़ता है।

भविष्य के लिए सांस्कृतिक सेतु

बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर विश्व के महानगरों तक, छठ पूजा भारतीय प्रवासियों के लिए एक सांस्कृतिक पुल का कार्य करता है। सूर्य देव की आराधना का यह पर्व हमें ब्रह्मांड से हमारे गहरे जुड़ाव की याद दिलाता है और इस भव्य संसार में हमारी विनम्रता, कृतज्ञता और सहनशीलता को बनाए रखता है।

छठ पूजा का बिहार से निकलकर पूरी दुनिया में प्रसार भारतीय संस्कृति की शक्ति और श्रद्धा का जीता जागता उदाहरण है। यह पर्व न केवल परिवारों और समुदायों के बीच बंधन को मजबूत करता है, बल्कि हमें प्रकृति के साथ हमारे गहरे जुड़ाव की याद भी दिलाता है। इस तरह, छठ पूजा भारतीय विरासत और आध्यात्मिकता का वह प्रकाश है जो सूर्य के उजाले और भक्तों की भक्ति के साथ पूरी दुनिया में फैल रहा है।

✍️... रघुनाथ सिंह

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