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डोनाल्ड ट्रंप की वापसी, नए सपनों की आस या सख्ती का एहसास?

Donald Trump arrives ahead of the 60th inaugural ceremony Monday at the Capitol. Image Source: The Washington Post

  • अमेरिका की नीति में नया रंग, क्या दोस्ती-दुश्मनी का बदलेगा ढंग?
  • क्या भारत-अमेरिका के रिश्तों की बहेगी धारा, बढ़ेगा सहयोग या फिर दोबारा किनारा?
  • वैश्विक मंच पर बढ़ी हलचल भारी, नीतियों पर टिकी दुनिया सारी।
  • थर्ड जेंडर खत्म, घुसपैठियों के लिए बॉर्डर सील, WHO से अलग: राष्ट्रपति बनते ही एक्टिव हुए Donald Trup, भारत के लिए ‘प्रीमियम’ सीट, कई देशों के प्रमुख बैठे पीछे।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक नए नेता का स्वागत किया है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने देश के 47वें राष्ट्रपति के रूप में कैपिटल रोटुंडा में आयोजित एक भव्य समारोह में शपथ ली। इस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष दूत के रूप में शामिल हुए। ट्रंप ने सत्ता में आते ही तेजी से निर्णय लेना शुरू कर दिया, जिसमें मेक्सिको सीमा पर आपातकाल लागू करना और अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर करना शामिल है।

शपथ ग्रहण समारोह में भारत की भागीदारी


शपथ ग्रहण समारोह में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की उपस्थिति ने भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व को दर्शाया। जयशंकर को अग्रिम पंक्ति में स्थान दिया गया, जिससे भारत को मिलने वाली प्राथमिकता का पता चलता है। ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान जयशंकर को संबोधित किया, जो भारत के प्रति उनकी रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाता है। समारोह में कई अन्य देशों के नेताओं को पीछे बिठाया गया था, जिससे भारत की अहमियत स्पष्ट होती है।

'स्वर्ण युग' की शुरुआत का वादा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने उद्घाटन भाषण में अमेरिका के 'स्वर्ण युग' की शुरुआत का वादा किया और कहा कि अमेरिका अब किसी भी देश के सामने नहीं झुकेगा। यह बयान उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को मजबूत करता है, जो वैश्विक सहयोग से अधिक राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने पर केंद्रित है।

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कई नीतिगत बदलाव किए गए हैं, जिनका अमेरिका और वैश्विक समुदाय पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। उनके कुछ प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं:

WHO से बाहर: ट्रंप ने WHO से अमेरिका को अलग करने की घोषणा की और इसे अमेरिका के हितों के विरुद्ध बताते हुए फंडिंग रोक दी।

पेरिस जलवायु समझौते से बाहर: ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते को 'अमेरिका विरोधी' करार देते हुए इससे बाहर निकलने का ऐलान किया।

BRICS देशों को चेतावनी: ब्रिक्स देशों (भारत, चीन, ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका) को अमेरिका विरोधी कदम उठाने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

टिकटॉक को मोहलत: चीन समर्थित ऐप टिकटॉक को अमेरिकी कानूनों का पालन करने के लिए 75 दिनों का समय दिया गया है।

थर्ड जेंडर की मान्यता समाप्त: अमेरिका में ट्रंप ने केवल 'पुरुष और महिला' को कानूनी रूप से मान्यता दी और थर्ड जेंडर को खारिज कर दिया।

मेक्सिको सीमा पर आपातकाल: अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए दक्षिणी सीमा पर आपातकाल घोषित कर सेना तैनात की गई।

ग्रीनलैंड पर नजर: ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया और वहां आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना बनाई।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: सरकारी सेंसरशिप को रोकने के लिए एक नया आदेश जारी किया गया।

कैपिटल हिल हिंसा के आरोपियों को माफी: ट्रंप ने कैपिटल हिल हिंसा में शामिल 1500 रिपब्लिकन समर्थकों को माफी दी।

कनाडा-मेक्सिको पर आयात कर: कनाडा और मैक्सिको से आयातित वस्तुओं पर 25% कर लगाने की घोषणा की गई।

ट्रंप की नीतियों को लेकर घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। समर्थक उनके राष्ट्रवादी रुख की सराहना कर रहे हैं, जबकि आलोचक इन फैसलों को आर्थिक और कूटनीतिक रूप से हानिकारक मान रहे हैं।

अमेरिकी व्यवसायों ने उनके कर और नियामक सुधारों का स्वागत किया है, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने उनकी लैंगिक पहचान और आव्रजन नीतियों की आलोचना की है।

यूरोपीय संघ और चीन ने उनके व्यापार नीतियों को लेकर चिंता जताई है, जबकि भारत के साथ अमेरिकी संबंध मजबूत होते दिख रहे हैं। WHO से अमेरिका की वापसी से वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय चिंतित है।

ट्रंप प्रशासन के सामने कई चुनौतियाँ हैं:

  • आर्थिक पुनरुद्धार: महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना।
  • कूटनीतिक संबंध: सहयोगी देशों के साथ संबंधों को बनाए रखना।
  • सामाजिक अशांति: आव्रजन और लैंगिक पहचान जैसे मुद्दों पर घरेलू असंतोष।
  • वैश्विक नेतृत्व: अंतरराष्ट्रीय समझौतों से हटने के बावजूद अमेरिका की स्थिति को बनाए रखना।

डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता में वापसी अमेरिका के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जो साहसी नीतियों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके निर्णय वैश्विक परिदृश्य, आर्थिक नीतियों और सामाजिक गतिशीलता को प्रभावित करेंगे।आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप की 'स्वर्ण युग' की परिकल्पना कितनी प्रभावी सिद्ध होती है।

✍️... रघुनाथ सिंह

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